संक्षिप्त जवाब: हां - परिवार कई फोन एक ही सिक्योरिटी ट्रे में रख सकता है, बशर्ते वे सपाट, बिना ढके, साथ-साथ लेटे हों। एयरपोर्ट गाइडेंस (दिल्ली एयरपोर्ट का सिक्योरिटी पेज साफ कहता है) यह है कि इलेक्ट्रॉनिक्स - फोन, लैपटॉप, स्मार्टवॉच, टैबलेट - स्क्रीनिंग के लिए ट्रे में रखे जाएं, और जो शब्द लोगों को उलझाता है वह है 'अलग': इसका मतलब बैग से बाहर निकालकर ट्रे में है, एक डिवाइस एक ट्रे नहीं। जिसे सचमुच अपनी ट्रे चाहिए, वह बड़ी चीजें हैं: लैपटॉप और टैबलेट सपाट और अकेले, क्योंकि उनके ऊपर-नीचे कुछ भी परत बनाए X-ray की तस्वीर धुंधली कर देता है और बैग दूसरी जांच में चला जाता है।
ट्रे के पीछे का नियम। स्क्रीनिंग मानक ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) बनाता है, और चेकपॉइंट ज्यादातर एयरपोर्ट पर CISF चलाता है। X-ray स्क्रीन के सामने बैठे अधिकारी को साफ, पठनीय छवि चाहिए: एक-दूसरे पर ढके इलेक्ट्रॉनिक्स एक घना स्लैब दिखते हैं, और घना स्लैब ही वह चीज है जो ट्रे को मैनुअल जांच में खिंचती है। सपाट लेटे तीन फोन साफ पढ़े जाते हैं। वही तीन फोन सैंडविच की तरह ढेर हों, तो दोबारा स्कैन हो सकता है - जो दूसरी ट्रे लेने से धीमा पड़ता है।
बेल्ट पर काम आने वाली पारिवारिक व्यवस्था। कन्वेयर पर पहुंचते ही दो-तीन ट्रे उठाइए - ट्रे मुफ्त हैं और कोई नहीं गिनता। पहली ट्रे: परिवार के सारे फोन, घड़ियां, बटुए, चाबियां और सिक्के, सपाट। दूसरी ट्रे: लैपटॉप या टैबलेट, अकेला और सपाट। तीसरी ट्रे: लिक्विड पाउच (हर कंटेनर 100 मिली या कम, साफ रीसीलेबल बैग में एक साथ) और जैकेट व बेल्ट। दिल्ली एयरपोर्ट तो चार्जर, ईयरफोन और चश्मे भी ट्रे या केस में रखने को कहता है, ताकि रोलर में न फंसें। फिर वह आदत जो हर बार परिवार बचाती है: बेल्ट से पहले तय कर लीजिए कि दूसरी तरफ कौन कौन-सी ट्रे उठाएगा।
छोटी चीजें जो अतिरिक्त जांच करवाती हैं। ढेर किए फोन, उसी ट्रे में जैकेट के नीचे छिपा फोन, बैग में ही छोड़े पावर बैंक (वे कैबिन बैगेज में ही जाएं और X-ray में साफ दिखें), और छाते या सेल्फी स्टिक जिन्हें अधिकारी अक्सर अलग देखते हैं। और एक भारत-विशेष आदत: चेकपॉइंट पर फोटोग्राफी मना है, तो परिवार का फोन हाथ में नहीं, ट्रे में रहे।
लेन कुछ और कहे, तो लेन मानिए। कुछ भारतीय एयरपोर्ट अब चुनिंदा लेनों पर नए स्कैनर चलाते हैं जो लैपटॉप निकाले बिना बैग की साफ छवि ले लेते हैं - जहां यह उपकरण है, उस लेन का साइन बोर्ड बताता है। बाकी हर जगह डिफॉल्ट वही है: बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स बाहर, सपाट, अकेले; छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स बाहर, सपाट, साझा ट्रे ठीक। संदेह हो, तो देखिए बेल्ट पर खड़ा अधिकारी आगे की कतार को क्या कह रहा है - वह निर्देश हर सामान्य नियम से ऊपर है, इस लेख समेत।
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