छोटा जवाब: सीढ़ियां जबरन न चढ़ें। एस्केलेटर बंद या अवरुद्ध हो, तो पहला काम रुककर लिफ्ट ढूंढना है - जिन स्टेशनों पर एस्केलेटर है, वहां लिफ्ट भी होती है, अक्सर उसी फुट ओवरब्रिज पर। लिफ्ट न हो या वह भी बंद हो, तो वर्दीधारी कोई भी रेलवे स्टाफ मदद करा सकता है: व्हीलचेयर, सामान उठाने और सहारा देने के लिए स्टाफ या कुली, या जहां हो वहां रैंप का रास्ता। एकमात्र गलत विकल्प यह है कि बुजुर्ग माता-पिता कंक्रीट की सीढ़ियों पर इसलिए कश्ती खाएं क्योंकि किसी ने मदद नहीं मांगी।
पहले: लिफ्ट और रैंप तलाशें। बड़े स्टेशनों पर एस्केलेटर और लिफ्ट आमतौर पर जोड़े में लगी होती हैं, और जहां लिफ्ट नहीं, वहां कई स्टेशनों पर रैंप होता है - कभी-कभी प्लेटफॉर्म के बीच नहीं, आखिरी छोर पर। एक्सेसिबिलिटी के साइन फॉलो करें, और याद रखें लिफ्ट किसी दूसरे ओवरब्रिज पर भी हो सकती है। दो मिनट की तलाश या इंक्वायरी काउंटर का एक सवाल खतरनाक चढ़ाई बचा देता है।
दूसरे: पूछिए - स्टेशन का स्टाफ ठीक इसी के लिए है। वर्दी में कोई भी हो, इंक्वायरी काउंटर या RPF पोस्ट से साफ कहें: 'सीनियर सिटीजन है, एस्केलेटर बंद है - व्हीलचेयर या मदद मिल सकती है?' स्टेशन स्टाफ यह रोज संभालता है: व्हीलचेयर बुला सकता है (कई स्टेशनों पर मुफ्त), सामान के लिए कुली लगवा सकता है ताकि आपके दोनों हाथ माता-पिता के लिए खाली रहें, और स्टेप-फ्री रास्ते तक साथ चल सकता है। आसपास कोई न दिखे, तो प्लेटफॉर्म से ही RailMadad 139 पर कॉल करें - यह स्टेशन की मदद व्यवस्था से जोड़ता है और आपकी रिक्वेस्ट दर्ज होती है, जिससे ध्यान जल्दी मिलता है।
तीसरे: माता-पिता बैठकर इंतजार करें, आप इंतजाम करें। सबसे सुरक्षित तरीका: बुजुर्ग यात्री को बैगों के साथ भीड़ के बहाव से दूर बेंच पर बिठाएं, और एक व्यक्ति लिफ्ट देखने या स्टाफ बुलाने जाए। ट्रेन आ रही है इसलिए जल्दबाजी नहीं - प्लेटफॉर्म पर दस मिनट ज्यादा, कंक्रीट की सीढ़ियों पर गिरने से कहीं बेहतर है। ट्रेन आराम से पकड़ी नहीं जा सकती, तो चढ़ाई का जोखिम लेने के बजाय अगली ट्रेन के बारे में TTE या स्टेशन स्टाफ से बात करें।
अगर सच में सिर्फ सीढ़ियां ही रास्ता हों। कभी-कभी छोटे स्टेशनों पर ऐसा होता है। तब सुरक्षित तरीके से: एक व्यक्ति आगे, खाली हाथ, बाजू देते हुए; माता-पिता दूसरी ओर रेलिंग पकड़कर अपनी रफ्तार से चढ़ें और चौबारे पर आराम करें; सारा सामान कुली या दूसरा व्यक्ति संभाले - माता-पिता कुछ न उठाएं। चौबारे आराम के लिए ही हैं; हर एक का इस्तेमाल करें। भीड़ को कभी रफ्तार तय न करने दें।
और अगली यात्रा से पहले: उम्मीद नहीं, पुष्टि। यात्रा से एक दिन पहले RailMadad (139) पर दो मिनट की कॉल से पता चल जाता है कि स्टेशन की लिफ्ट और एस्केलेटर चल रही हैं या नहीं - और नामित स्टेशनों पर IRCTC की ई-व्हीलचेयर सेवा से व्हीलचेयर पहले से बुक हो जाती है। कई बार तो पास के बेहतर सुविधा वाले स्टेशन से चढ़ना ही सबसे समझदार प्लान होता है।
TripKeeper स्टेशन एक्सेस कैसे संभालता है। जब हम बुजुर्ग यात्रियों की ट्रेन यात्रा प्लान करते हैं, तो हर स्टेशन का स्टेप-फ्री रास्ता तय करते हैं और व्हीलचेयर व कुली पहले से लगवाते हैं - ताकि खराब एस्केलेटर संकट नहीं, एक पहले से सोचा हुआ मोड़ हो। अगर आप माता-पिता की यात्रा ऐसे ही प्लान करवाना चाहते हैं, तो हमें ट्रिप-प्लानिंग इंक्वायरी भेजिए।
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