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क्या व्हीलचेयर यात्री पोर्टेबल रैंप से भारतीय ट्रेन में चढ़ सकता है?

हां, रोज होता है - लेकिन प्लेटफॉर्म पर पोर्टेबल रैंप मौजूद होगी, इसकी गारंटी नहीं, इसलिए तैयार रास्ता अपनाएं: चौड़े दरवाजे और व्हीलचेयर स्पेस वाला SLRD कोच, दिव्यांग कोटे में बुक, और RailMadad से पहले से मदद तय।

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Railway staff approaching a woman in a wheelchair beside a train coach
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छोटा जवाब: हां - कई स्टेशनों पर व्हीलचेयर यात्री पोर्टेबल रैंप से ट्रेन में चढ़ते हैं, और जहां रैंप नहीं होती, वहां रेलवे स्टाफ तालमेल से बोया उठाकर चढ़ाते हैं। लेकिन पोर्टेबल रैंप हर प्लेटफॉर्म का स्टैंडर्ड सामान नहीं है, इसलिए भरोसेमंद योजना खुद रैंप नहीं है: वह है दिव्यांग-फ्रेंडली SLRD कोच (जिसका दरवाजा चौड़ा और अंदर व्हीलचेयर की जगह है) में बुकिंग, और RailMadad (139) से पहले से सहायता तय करना। रैंप तब एक अच्छा बोनस बन जाती है, नाकामी का इकलौता कारण नहीं।

इसके लिए बना कोच: SLRD। ICF डिजाइन कोचों वाली ज्यादातर मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में SLRD कोच होता है - सेकंड क्लास सह लगेज सह गार्ड वैन, जिसमें दिव्यांग-फ्रेंडली डिब्बा है। ये व्हीलचेयर यात्रियों के लिए बने हैं: चौड़ा एंट्रेंस दरवाजा, चौड़ी बर्थें, डिब्बे के अंदर व्हीलचेयर के लिए निर्धारित जगह, और ग्रैब रेल वाला बड़ा अनुकूलित शौचालय। पूरी तरह एयर-कंडीशंड गरीब रथ ट्रेनों में पावर कार में AC दिव्यांग-फ्रेंडली डिब्बा होता है। रिजर्वेशन के समय दिव्यांगजन कोटे से SLRD डिब्बे में बुकिंग करने से यात्री उस कोच में पहुंचता है जिसके दरवाजे से व्हीलचेयर सच में गुजरती है। यह किसी भी रैंप से ज्यादा मायने रखता है।

पोर्टेबल रैंप कहां फिट होती है। स्टेशन बिल्डिंग में बैरियर-फ्री एंट्री के लिए रैंप A-1, A और B श्रेणी के स्टेशनों पर नियोजित मानक सुविधा है, और कुछ स्टेशनों व ज़ोनों के पास प्लेटफॉर्म-से-कोच के गैप के लिए पोर्टेबल रैंप भी है - लेकिन उपलब्धता असमान है, और ये प्लेटफॉर्म किनारे नहीं, स्टेशन स्टाफ के पास रहती हैं। पाने का तरीका पहले से पूछना है: यात्रा से एक-दो दिन पहले RailMadad (139) पर कॉल करें, बताएं कि व्हीलचेयर यात्री चढ़ेगा, और पूछें स्टेशन क्या इंतजाम करेगा। जब स्टाफ को पता होता है कि व्हीलचेयर आ रही है, तो वे तैयारी के साथ आते हैं - रैंप हो तो रैंप के साथ, न हो तो काफी हाथों के साथ।

जब रैंप न हो: चढ़ाई असल में कैसे होती है। दो से चार स्टाफ या परिजन व्हीलचेयर समेत यात्री को कोच के छोटे से स्टेप से ऊपर उठाते हैं - भारतीय स्टेशनों पर रोज होने वाला, और बिना जल्दबाजी किया तो सुरक्षित, काम। सुरक्षा के नियम: सब अपनी जगह पर आएं तभी कोई उठाए, व्हीलचेयर के ब्रेक सिर्फ लुढ़काते समय खुले हों, यात्री के पैर फुटरेस्ट पर रहें, और उठाने का काम आम भीड़ की चढ़ाई से पहले हो, उसके बीच में नहीं। जल्दी चढ़ना - SLRD कोच गार्ड के पास, ट्रेन के आखिरी सिरे पर होता है - भीड़ से पूरी तरह बचा देता है।

पहले से इंतजाम की चेकलिस्ट। एक: दिव्यांग कोटे से SLRD डिब्बा बुक करें, या सबसे सुलभ बर्थ। दो: RailMadad 139 पर कॉल करके स्टेशन, ट्रेन और तारीख के साथ सहायता रिक्वेस्ट दर्ज कराएं। तीन: नामित स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म साइड के लिए IRCTC की ई-व्हीलचेयर सेवा से स्टेशन व्हीलचेयर बुक करें। चार: उस दिन जल्दी पहुंचकर TTE या गार्ड को ढूंढें - SLRD कोच उन्हीं का ऑफिस है, और चढ़ाई का तालमेल वही करते हैं। पांच: डेस्टिनेशन पर भी RailMadad से वही रिक्वेस्ट उतरने में काम आती है।

TripKeeper व्हीलचेयर यात्रा कैसे प्लान करता है। जब हम व्हीलचेयर यात्रियों की रेल यात्रा प्लान करते हैं, तो सही कोच बुक करते हैं, दोनों छोरों पर स्टेशन सहायता तय करते हैं, और हर स्टेशन क्या दे सकता है यह यात्रा से पहले तय करते हैं - ताकि चढ़ाई एक प्रक्रिया हो, इम्प्रोवाइजेशन नहीं। अगर आप अपने परिवार के लिए यह प्लानिंग चाहते हैं, तो हमें ट्रिप-प्लानिंग इंक्वायरी भेजिए।

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Cheshta Agarwal
Founder · Travel Creator · Lawyer

A Miranda House graduate and lawyer who traded courtrooms for slow travel. Cheshta travels with the batches we host ourselves, with a soft spot for travelling alongside elders.

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